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Plane Crash : ऊंची उड़ान के सपने और अधूरी कहानी : बारामती प्लेन क्रैश में पायलट Shambhavi Pathak का जाना

Report by : Sakshi Singh, National Khabar

  • ऊँची उड़ान के सपने और अधूरी कहानी
  • एक हादसा, जिसने कई घरों की रोशनी बुझा दी
Plane Crash

Plane Crash : एक हादसा,जिसने कई घरों की रोशिनी बुझा दी

Plane Crash : बारामती में हुए दर्दनाक विमान हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया हैं। इस दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार जिस फ्लाइट में सवार थे, उसे कैप्टन सुमित कपूर और युवा पायलट शांभवी पाठक ऑपरेट कर रहे थे। दुर्भाग्यवश इस हादसे में दोनों पायलटों समेत कुल पाँच लोगों की जान चली गई। इस त्रासदी ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों बल्कि आम लोगों के दिलों को भी गहरे शोक में डुबो दिया है।

शांभवी पाठक: एक नाम, जो सपनों की ऊँचाई का प्रतीक था

इस हादसे में जिन नामों ने सबसे ज्यादा भावुक कर दिया, उनमें से एक नाम था—शांभवी पाठक। युवा, प्रतिभाशाली और महत्वाकांक्षी पायलट शांभवी हमेशा से ऊँची उड़ान भरने का सपना देखा करती थीं। उन्होंने न सिर्फ सपने देखे, बल्कि उन्हें साकार करने के लिए कड़ी मेहनत भी की। लेकिन किसे पता था कि उनकी यही उड़ान एक दिन हमेशा के लिए थम जाएगी।

Plane Crash : दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव में पसरा मातम

दिल्ली के पॉश इलाके सफदरजंग एन्क्लेव के ए-ब्लॉक की एक चार मंज़िला इमारत की पहली मंज़िल पर शांभवी का परिवार रहता है। हादसे के बाद यह घर गहरे सन्नाटे में डूबा हुआ है। जिस घर में कभी सुबह बालकनी के परदे खुलते ही चहल-पहल शुरू हो जाती थी, वहां आज देर सुबह तक परदे भी नहीं खुले। घर के बाहर और भीतर रिश्तेदारों और करीबी लोगों का जमावड़ा लगा है, लेकिन कोई बोलने की स्थिति में नहीं है। हर आंख नम है, हर चेहरा ग़मगीन।

Plane Crash : रिश्तेदारों और दोस्तों का फूट-फूटकर रोना

शांभवी को याद करते हुए रिश्तेदार और परिचित खुद को संभाल नहीं पा रहे। कोई उनकी बचपन की बातें याद कर रहा है, तो कोई उनकी मेहनत और लगन की मिसालें दे रहा है। हर किसी की जुबान पर बस एक ही बात है—“इतनी होनहार लड़की, इतनी जल्दी चली गई।”
शांभवी की मां की एक करीबी दोस्त ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्होंने शांभवी को अपनी आंखों के सामने पढ़ते-लिखते और आगे बढ़ते देखा है। पिछले कुछ समय से बातचीत कम हो गई थी, क्योंकि शांभवी ज्यादातर समय ड्यूटी पर रहती थीं। उनकी व्यस्त जिंदगी अब परिवार के लिए सबसे बड़ी टीस बन गई है।

Plane Crash : नई शुरुआत से पहले ही छा गया अंधेरा

पड़ोस में रहने वाले और इमारत के चौकीदार शिवनारायण बताते हैं कि शांभवी का परिवार कुछ ही दिनों पहले इस नई बिल्डिंग में शिफ्ट हुआ था। घर में अभी ठीक से पर्दे तक नहीं लगे थे, गमले भी नहीं सजे थे। नई शुरुआत की खुशियाँ मनाने से पहले ही यह परिवार गहरे शोक में डूब गया। शिवनारायण बताते हैं कि परिवार का व्यवहार बेहद सौम्य और सम्मानजनक था। शांभवी के पिता फौजी रहे हैं और जब भी उन्होंने शांभवी को अपने पिता के साथ देखा, उनका व्यवहार हमेशा विनम्र और सुसंस्कृत रहा।

Plane Crash : शिक्षा और संघर्ष की कहानी

शांभवी पाठक की शुरुआती पढ़ाई दिल्ली के प्रतिष्ठित एयर फोर्स बाल भारती स्कूल से हुई थी। बचपन से ही उनमें अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण साफ नजर आता था। पायलट बनने का सपना उन्होंने बहुत पहले देख लिया था और उसे पूरा करने के लिए देश-विदेश तक मेहनत की।

उन्होंने अपनी पायलट ट्रेनिंग न्यूजीलैंड से ली, जहां उन्होंने आधुनिक उड़ान तकनीकों और कठिन प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा किया। इसके बाद कुछ समय तक उन्होंने मध्य प्रदेश के एक फ्लाइंग क्लब में भी काम किया। उनकी मेहनत, लगन और प्रोफेशनलिज़्म ने उन्हें बहुत कम उम्र में एक जिम्मेदार पायलट बना दिया था।

Plane Crash : ड्यूटी पहले, सब कुछ बाद में

शांभवी की जिंदगी का बड़ा हिस्सा उनके काम को समर्पित था। परिवार और दोस्तों का कहना है कि वह हमेशा ड्यूटी को प्राथमिकता देती थीं। छुट्टियाँ कम लेती थीं और लगातार उड़ानों में व्यस्त रहती थीं। शायद यही वजह थी कि हाल के दिनों में परिवार से मुलाकातें और बातचीत कम हो गई थीं। आज वही कमी परिवार को सबसे ज्यादा चुभ रही है।

Plane Crash : हादसे ने छोड़े कई सवाल

बारामती प्लेन क्रैश ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं—हादसा आखिर कैसे हुआ, क्या तकनीकी खामी थी या मौसम ने भूमिका निभाई? इन सवालों की जांच जारी है, लेकिन जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके लिए जवाबों से ज्यादा यह खालीपन भारी है, जिसे कभी भरा नहीं जा सकता।

Plane Crash : यादों में जिंदा रहेंगी शांभवी

आज शांभवी पाठक भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कहानी, उनके सपने और उनका संघर्ष हमेशा लोगों को प्रेरित करता रहेगा। वह एक ऐसी बेटी थीं, जिन्होंने अपने परिवार का नाम रोशन किया, एक ऐसी पायलट थीं जिन्होंने आसमान को अपना घर बनाया, और एक ऐसी इंसान थीं, जिनकी मुस्कान और सादगी हर किसी के दिल में बस गई।

Plane Crash : सुना आंगन और अधूरे सपने

शांभवी के जानें से उनका घर,उनका आंगन सुना हो गया हैं। जहाँ कभी कदमों की आहट होती थी,वहाँ अब ख़ामोशी पसरी हैं। परिवार के बीच अब सिर्फ यादें छोड़ गई हैं -कुछ तस्वीरें,कुछ किस्से और ढेर सारा प्यार।

बारामती का यह हादसा सिर्फ एक विमान दुर्घटना नहीं,बल्कि उन सपनों का टूटना हैं,जो ऊंची उड़ान भरना चाहते थे। शांभवी पाठक की कहानी हमें यह याद दिलाती हैं कि जिंदगी कितनी अनिश्चित है, लेकिन साथ ही यह भी कि कम समय में भी कोई इंसान कितनी बड़ी छाप छोड़ सकता है।

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