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PM Narendra Modi : संसद में क्यों नहीं हो पाया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण ?

Report by : Sakshi Singh, National Khabar

  • संसद में क्यों नहीं हो पाया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण?
  • हंगामे की भेंट चढ़ा राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब
PM Narendra Modi

PM Narendra Modi : हंगामे की भेंट चढ़ा राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब,सियासत हुई तेज़

संसद का ठप होना,सवालों के घेरे में लोकतंत्र

देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था संसद एक बार फिर हंगामे की भेंट चढ़ गई। शाम 5 बजे लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुप्रतीक्षित संबोधन प्रस्तावित था,जिसमें उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर जवाब देना था। लेकिन ठीक संबोधन से पहले सदन में ऐसा शोर-शराबा शुरू हुआ कि कार्यवाही आगे बढ़ ही नहीं सकी। नतीजा-प्रधानमंत्री का भाषण टाल दिया गया और राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।

PM Narendra Modi : क्या था प्रधानमंत्री के संबोधन का महत्व ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह भाषण केवल एक औपचारिक जवाब नहीं था,बल्कि सरकार की नीतियों,उपलब्धियों और भविष्य की दिशा को स्पष्ट करने का अहम अवसर माना जा रहा था।

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री का जवाब सरकार की आधिकारिक सोच को सामने रखता हैं। इसमें विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब,नीति निर्धारण की प्राथमिकताएं और राष्ट्रिय मुद्दों पर सरकार का रुख स्पष्ट किया जाता हैं।

PM Narendra Modi : सदन में हंगामे की असली वजह क्या रही?

संसद में हंगामे की जड़ में कई मुद्दे शामिल थे। विपक्ष लगातार कुछ संवेदनशील विषयों पर चर्चा की मांग कर रहा था। इनमें शामिल थे—

जांच एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप
महंगाई और बेरोज़गारी
राज्यों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे
हालिया राजनीतिक घटनाक्रम

विपक्ष का आरोप था कि सरकार इन मुद्दों पर चर्चा से बच रही है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना था कि विपक्ष जानबूझकर संसद को चलने नहीं दे रहा।

PM Narendra Modi : जैसे ही प्रधानमंत्री आने वाले थे, बढ़ गया शोर

संसद सूत्रों के अनुसार, जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सदन में आने की सूचना मिली, विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठ खड़े हुए। नारेबाजी तेज़ हो गई, तख्तियां लहराई गईं और स्पीकर की अपील के बावजूद शांति नहीं बनी।

बार-बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी और अंततः प्रधानमंत्री का संबोधन टालने का निर्णय लिया गया।

PM Narendra Modi : क्या बोले संसदीय कार्य मंत्री?

सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि

“विपक्ष लोकतंत्र की हत्या कर रहा है। प्रधानमंत्री का जवाब सुनना देश का अधिकार है, लेकिन विपक्ष इसे रोक रहा है।”

सरकार का दावा है कि वह हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार थी, लेकिन विपक्ष केवल हंगामा चाहता था।

PM Narendra Modi : विपक्ष का पलटवार: सरकार बहस से डरती है

वहीं विपक्ष ने सरकार के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि

“सरकार असली मुद्दों से भाग रही है। अगर बहस की इजाज़त दी जाती, तो हंगामे की नौबत ही नहीं आती।”

उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री केवल एकतरफा भाषण देना चाहते थे, लेकिन सवालों का सामना नहीं करना चाहते।

PM Narendra Modi : बार-बार बाधित होती संसद: चिंता का विषय

यह पहली बार नहीं है जब संसद की कार्यवाही हंगामे के कारण बाधित हुई हो। पिछले कुछ सत्रों में देखा गया है कि

महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा नहीं हो पाती
जनता से जुड़े मुद्दे पीछे छूट जाते हैं
करदाताओं का पैसा बर्बाद होता है

लोकतंत्र में संवाद और बहस सबसे अहम हथियार होते हैं, लेकिन हंगामे ने संसद की गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रधानमंत्री के भाषण के टलने का राजनीतिक असर

प्रधानमंत्री का संबोधन टलना केवल संसदीय प्रक्रिया का मामला नहीं रह गया है। यह अब पूरी तरह राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।

सत्ता पक्ष इसे विपक्ष की नकारात्मक राजनीति बता रहा है
विपक्ष इसे सरकार की असहिष्णुता करार दे रहा है

दोनों ही पक्ष इस घटना को जनता के सामने अपने-अपने तरीके से पेश कर रहे हैं।

PM Narendra Modi : जनता के मन में उठते सवाल

संसद में बार-बार होने वाले हंगामों से आम जनता के मन में कई सवाल खड़े हो रहे हैं—

क्या सांसद जनता के मुद्दों पर गंभीर हैं?
क्या संसद केवल राजनीतिक ड्रामे का मंच बनती जा रही है?
क्या लोकतांत्रिक मर्यादाएं कमजोर हो रही हैं?

जनता चाहती है कि संसद में बहस हो, समाधान निकले और देश आगे बढ़े।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संबोधन कब होगा। संसदीय कार्य मंत्रालय नए समय की घोषणा कर सकता है, लेकिन यह तभी संभव होगा जब सदन में सहमति और शांति का माहौल बने।

प्रधानमंत्री का भाषण टलना केवल एक घटना नहीं, बल्कि हमारे संसदीय लोकतंत्र की मौजूदा स्थिति का आईना है। सत्ता पक्ष और विपक्ष—दोनों की ज़िम्मेदारी है कि संसद को चलने दें, क्योंकि संसद चलती है तो ही लोकतंत्र मज़बूत होता है।
हंगामे से सुर्खियां भले मिल जाएं, लेकिन देश का भला संवाद, बहस और समाधान से ही होगा।

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