Lohri celebration 2026 : लोहरी मानाने के पीछे की सबसे बड़ी वजह ये थी, जानकर हो जाएंगे Surprise

Report by : Sakshi Singh, National Khabar
- सर्दियों के अंत और खुशहाली की शुरुआत का पर्व
- लोहड़ी कब और क्यों मनाई जाती है ?
- लोहड़ी क्यों मनाई जाती हैं ?
- दुल्ला भट्टी की कथा
- अग्नि पूजा का महत्व : आग क्यों जलाई जाती हैं ?
- पॉपकॉर्न और लोहड़ी : क्या हैं गहरा संबध ?

Lohri : क्यों मनाई जाती है लोहड़ी,क्या है इसका इतिहास और पॉपकॉर्न से क्या है खास रिश्ता ?
Lohri : भारत विविधताओं का देश है,जहां हर मौसम,हर फसल और हर भावना के साथ कोई न कोई पर्व जुड़ा हुआ है। उत्तर भारत,विशेष रूप से पंजाब,हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मनाया जाने वाला लोहड़ी पर्व सर्दियों के अंत और नई ऊर्जा के स्वागत का प्रतिक है। यह पर्व केवल एक त्योहार नहीं,बल्कि खेती,प्रकृति,लोककथाओं और सामूहिक ख़ुशी का उत्सव है।
Lohri कब और क्यों मनाई जाती है ?
Lohri हर साल 13 जनवरी को मनाई जाती है। यह दिन सूर्य के उत्तरायण होने से ठीक एक दिन पहले आता है। माना जाता है कि इसके बाद ठंड धीरे-धीरे कम होने लगती है और दिन बड़े होने लगते हैं।
Lohri क्यों मनाई जाती हैं ?
- सर्द ऋतू के अंत का संकेत
- रबी फसल (खासतौर पर गेहूं) की अच्छी पैदावार की कामना
- सूर्य देव और अग्नि देव की उपासना
- नई शुरुआत,विवाह या सतान जन्म की ख़ुशी का उत्सव
Lohri विशेष रूप से उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं,जहां नवविवाहित जोड़ा हो या घर में पहली सतान का जन्म हुआ हो।
Lohri का इतिहास : लोककथाओं और परंपराओं से जुड़ा पर्व
Lohri का कोई एक लिखित इतिहास नहीं हैं,लेकिन इसकी जुड़े लोककथाओं,ग्रामीण परंपराओं और वैदिक संस्कृति से जुडी हुई हैं।
दुल्ला भट्टी की कथा

Lohri का नाम लेते ही दुल्ला भट्टी का जिक्र जरूर आता हैं। वे मुग़ल काल के एक लोकनायक थे,जिन्हे पंजाब का “रॉबिन हुड” कहा जाता हैं। दुल्ला भट्टी ने अत्याचारों के खिलाफ आवाज़ उठाई | गरीब लड़कियों की रक्षा की, उनकी शादी हिंदू रीति-रिवाज़ से करवाई लोहड़ी के लोकगीतों में आज दुल्ला भट्टी का नाम गाया जाता हैं,जो इस पर्व को सामाजिक न्याय और साहस से जोड़ता हैं।
अग्नि पूजा का महत्व : आग क्यों जलाई जाती हैं ?
Lohri की सबसे प्रमुख पहचान हैं अग्नि जलाना। शाम होते ही लोग खुले स्थान पर अलाव जलाते हैं। आग का धार्मिक और सांस्कृतिक अर्थ अग्नि को साक्षी मानकर प्रार्थना नकरात्मक ऊर्जा को जलाकर सकारात्मकता का स्वागत सूर्य देव की कृपा पाने की कामना ठंड से राहत और सामूहिक गर्माहट लोग आग की परिक्रमा करते हैं और उसमे तिल,गुड़ ,मूंगफली और पॉपकॉर्न अर्पित करते हैं।
Lohri और पॉपकॉर्न : क्या हैं गहरा संबध ?
लोहड़ी और पॉपकॉर्न का रिश्ता बहुत खास और प्रतीकात्मक हैं। पॉपकॉर्न दरअसल मक्का के दानों से बनता हैं। जब मक्का का दाना आग में डाला जाता हैं,तो वह फुटकर सफ़ेद और हल्का हो जाता हैं। जीवन में बदलाव और उन्नति, कठिन परिस्थतियों के बाद सुख और समृद्धि, अंदर छुपी संभावनाओं का बाहर आना जिस तरह मक्का का दाना आग में तपकर पॉपकॉर्न बनता हैं,उसी तरह इंसान भी संघर्ष के बाद निखरता हैं। लोहड़ी में बांटे जाने वाले प्रसाद को “लोहड़ी” कहा जाता है, जिसमें शामिल होते हैं: मूंगफली, रेवड़ी, गजक, तिल और गुड, पॉपकॉर्न।
तिल-गुड़ का महत्व

तिल और गुड़ सर्दियों में शरीर को गर्म रखते हैं और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं। यही कारण है कि लोहड़ी में इनका विशेष स्थान है।
लोकगीत और नृत्य: ढोल की थाप पर उत्सव

Lohri का आनंद लोकगीतों और नृत्य के बिना अधूरा है। पुरुष भांगड़ा करते हैं, महिलाएं गिद्धा करती हैं, ढोल की थाप पर पूरा माहौल उल्लास से भर जाता है लोकगीतों में दुल्ला भट्टी, फसल और खुशहाली की बातें गाई जाती हैं। लोहड़ी मूल रूप से कृषि आधारित पर्व है। यह किसानों के लिए बेहद खास होता है।
गेहूं की फसल खेतों में लहलहा रही होती है
किसान अच्छी पैदावार की प्रार्थना करते हैं
प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है
यह पर्व इंसान और प्रकृति के रिश्ते को मजबूत करता है। आज लोहड़ी सिर्फ गांवो तक सीमित नहीं हैं। शेहरो,सोसाइटी,स्कूल और ऑफिस में भी इसे धूमधाम से मनाया जाता हैं।
सामूहिक आयोजन
सांस्कृतिक कार्यक्रम
बच्चों का विशेष भागीदारी
सोशल मीडिया पर लोहड़ी की शुभकामनाएं
Lohri केवल एक त्योहार नहीं,बल्कि आस्था,संस्कृति,कृषि और सामूहिक आनंद का उत्सव है। उसका इतिहास हमें साहस और सामाजिक मूल्यों की सीख देता है,जबकि पॉपकॉर्न और अग्नि जीवन के गहरे प्रतिक है।







