“दाल में कुछ काला है” टमाटर के बाद अब दालों के दामों ने किया जीना हराम

रिपोर्ट: – प्रज्ञा झा


पिछले कुछ महीनों में टमाटर के दामों में जो उछाल था, उसने कई माध्यम वर्गीय परिवारों के घर के खाने से टमाटर का स्वाद ही छीन लिया था। पहले टमाटर और हो सकता है अब दालों का स्वाद न जाने लगे। तूर और उरद दालों के दामों में तेजी से उछाल आया है और आगे आने वाले समय में और भी इजाफा हो सकता है।
अगस्त के महीने में तूर और उरद दाल (अरहर और पीली दाल) के दामों में भी काफी इजाफा हुआ। तूर दाल में 10 रूपए का इजाफा हुआ जिसके बाद दाम 149 रूपए किलो तक और उरद दाल के दामों में 2 रूपए के इजाफे के साथ 118 रूपए किलो तक पहुँच चुके है। ये माध्यम वर्गीय परिवारों के लिए चिंता का सबब माना जा रहा है ।
1- इसकी वजह असमय की बारिश को भी माना जा रहा है। लगातार महाराष्ट्र और कर्णाटक में हुई मूसलाधार बारिश ने इस बार की फसल को
भी बर्बाद कर दिया।
2- साथ ही किसानो ने भी अब दालों और अन्य फसलों को छोड़ कर महंगे फसलों को उगाना शुरू कर दिया है।
3- 2018 से तूर दाल और उरद दाल के उत्पादन में लगातार गिरावट आई है और खपत तेजी से बढ़ी है।
4- खारीफ फसलों की देरी से बुआई भी इसका एक बड़ा कारन माना जा रहा है।

सरकार भी इसको लेकर कई कड़े कदम उठा रही है। 2 जून से 31 अक्टूबर तक जो स्टॉक लिमिट का फैसले केंद्र सरकार का था उसे बढ़ा कर 2 महीने और यानि दिसंबर तक कर दिया गया है।

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