11 जनवरी का इतिहास आजादी से पहले काफी बड़ा है, शास्त्री जी के बारे में कुछ रोचक जानकारी

रिपोर्ट :प्रज्ञा झा

1 जनवरी का इतिहास आजादी से पहले काफी बड़ा है ,लेकिन आजादी के बाद 11 जनवरी को देश के दूसरे प्रधानमंत्री और जय जवान जय किसान का नारा देने वाले लाल बहादुर शास्त्री के निधन के तौर पर जाना जाता है।

देश के दूसरे प्रधानमंत्री और जय जवान ,जय किसान का नारा देने वाले ‘लाल बहादुर शास्त्री’ का 11 जनवरी 1966 को ताशकंद समझौते के बाद रहस्यमय तौर से निधन हो गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उनका निधन दिल का दौरा पड़ने के कारण हुआ। शास्त्री जी की साफ छवि के कारण उन्हें पंडित जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद प्रधानमंत्री के तौर पर चुना गया। शास्त्री जी ने प्रधानमंत्री रहते हुए कई मुसीबतों से देश की रक्षा की, भूखमरी चारों ओर फैली हुई थी, देश 1962 में हुए चीन युद्ध से उभर ही रहा था, ऐसे में देश के पहले प्रधानमंत्री के निधन के बाद सरकार कौन चलाएगा इसका फैसला लेना थोड़ा मुश्किल माना जा रहा था।

इसमें कोई शक नहीं कि लाल बहादुर शास्त्री जी ने देश की कमान को बखूबी संभाला। 1965 का भारत–पाकिस्तान युद्ध शास्त्री जी के नेतृत्व में ही लड़ा गया, जिसमें भारत ने पाकिस्तान को करारी मात दी थी। ताशकंद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अयूब खान के साथ भारत-पाक युद्ध को खत्म करने के समझौते पर हस्ताक्षर के लिए शास्त्री वहां पहुंचे । जिसके उपरांत 11 जनवरी 1966 को रहस्यमय तौर पर उनका निधन हो गया।

–शास्त्री जी के बारे में कुछ रोचक जानकारी

शास्त्री जी का जन्मदिवस और महात्मा गांधी का जन्मदिवस एक ही दिन 2 अक्टूबर को आता है।

लाल बहादुर शास्त्री पढ़ने के शौकीन थे वह स्कूल जाने के लिए दिन में दो बार गंगा नदी को तैर कर पार करते थे और किताबों को अपने सिर पर बांधकर एक किनारे से दूसरे किनारे पहुंचते थे, क्योंकि उस वक्त शास्त्री जी पर नाव से जाने के पैसे नहीं हुआ करते थे।

उनके नाम में ‘शास्त्री’ शब्द का मतलब ‘स्कॉलर’ होता है जोकि उन्हें शिक्षा के दौरान दिया गया था। लेकिन बाद में शास्त्री शब्द उनका नाम ही बन गया।

उत्तर प्रदेश के मंत्री होने के दौरान उन्होंने पहली बार भीड़ को हटाने के लिए लाठीचार्ज का तरीका रुकवाया था।

भारत की आजादी के लिए लड़ते हुए शास्त्री जी करीबन दो बार, 9 सालों के लिए जेल में भी रहे थे उसी दौरान उन्होंने किताबों के अध्ययन भी किए थे।

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